अर्पित की रचनाएँ

समझता हूँ सब फिर भी खामोश रहता हूँ
मतलब यह नहीं कि मैं पागल हूँ
सारी गुस्ताखी तो इस दिल की है
जनाब दिल को सब वफादार कहते हैं 
निकला ये बेवफा ,
इस कदर मुझे तड़पाता है कि वो भूल गयी सब
फिर भी मै उसकी यादों में
खुद को जलाता हूँ
सजा तो मिलनी चाहिए तुझे ऐ मेरे दिल!! 
तभी मै खुद से ज्यादा तुझे रूलाता हूँ ||

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