Posts

Showing posts from May, 2020

अर्पित की रचनाएँ

समझता हूँ सब फिर भी खामोश रहता हूँ मतलब यह नहीं कि मैं पागल हूँ सारी गुस्ताखी तो इस दिल की है जनाब दिल को सब वफादार कहते हैं  निकला ये बेवफा , इस कदर मुझे तड़पाता है कि वो भूल गयी सब फिर भी मै उसकी यादों में खुद को जलाता हूँ सजा तो मिलनी चाहिए तुझे ऐ मेरे दिल!!  तभी मै खुद से ज्यादा तुझे रूलाता हूँ ||